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*वीणावादिनी की वंदना*

*दोहा*:-
विमल विमद वरदायिनी, वर दे विरद विवेक।
वरदहस्त वागेश्वरी, विनती ‘अमित’ अनेक।

*चौपाई*:-
वंदन शुभदा सादर शारद,
वर्ण वाक्य की आप विशारद।
वरदात्री हे जग कल्याणी,
वेणु मधुर हो मेरी वाणी।~1

वाग्देवी जय वीणाधारी,
वैभव व्यापक हंस सवारी।
विद्यादेवी आदि भवानी,
विमला विविधा विधा विधानी।~2

वाराही विधि गति-मति वाचक,
वरदायक त्रिभुवन संचालक।
विधिरानी वर ज्ञान विधाता,
विपदा हर सरस्वती माता।~3

वागपेत की सुर संरचना,
वसुदा वसो सदा ही रसना।
वरदानी श्रीप्रदा भारती,
वर्णमातृका आप आरती।~4

विद्यारूपा हृदय विमलता,
विनय करूँ दीजिये सफलता।
वेदान्ती हर *अमित* वेदना,
विद्याश्री अब रहे भेद ना।~5
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✍ *कन्हैया साहू “अमित”*✍
शिक्षक~भाटापारा (छ.ग)
संपर्क~9200252055
©opy ®ights…..
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