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दाई के दूध म अमृत होथे

आजकाल के लइका मन के, उमर बीमारी म पहावत हे, काबर ! आजकाल के दाई लइका ल अपन दूधे नई पियावत हे, अरे! देवता घलो मन, महतारी के दूध पिये बर, अपन जीव ल चुरोथे, काबर! दाई के दूध म अमृत होथे, आजकाल के दाई मन ल, बस अपन फिगर के चिंता हे, अरे! द्वापर त्रेता के दाई मन, फिगर के...

राजनीति हर दाद होगे

भले कोनो पार्टी म दम नई हे, फेर रैली म जवईया मन के टेस, विधायक ले कम नई हे, हाथ म पार्टी के झंडा अउ, मुँह म बीरोपान हे, पागे हे फोकटहा फटफटी, तहाँ देखावत अपन शान हे, दूदी सौ के रोजी म, नारा लगईया के भरमार हे, राजनीति के चिखला, सादा कुरथा के व्यापार हे, वर्तमान के...

कंजूस खोपड़ी

छत्तीसगढ़ी व्यंग -कंजूस खोपड़ी हद सबो के होथे। बिगर हद के पहिचान नइ बनय। ओकरे सेती अति ल जम्मो जघा बरजे गे हे। हद ले जादा होए ले नुकसाने होथे। फइदा के बाते झन सोचय। जे अन ल बिन खाए मनखे जीए नइ सकय। उही ल हद ले जादा खाए म खटिया धर लेथे। त अउ दूसर जिनिस के तो बाते छोड़ दे।...

बाँचगे खाली लोटा

बिन पेंदी के लोटा खेलय, राजनीति के गोंटा, अठन्नी बनगे खर-खर भईया, सिक्का होगे खोटा, जेने बनथे संगी भईया, उही मसकथे टोंटा, आस जम्मो छरियागे भईया, छरियागे सबके पोटा, खदर-बदर हे विचार ह भईया, जुच्छा जाही नोटा, दुआ-भेदी के अंगरा हे भईया, लूट डरिस जी कोटा, काजू-मेवा खादी...

एके हाथ ले ताली बजथे गा

व्यंग-एके हाथ ले ताली बजथे गा      आज-काल चारो डहर चुनाव के गोठ हवा मा घुरे हे । जेती देखव बस एकेठन काना फॅुसी हे ।  गाँव के टूरा-टनका मन एक-दूसर ले पूछत हे-कोन हा का बॉटत हे रे ?  फलनवा हा कुछु खर्चा-वर्चा बांटत हे का रे ?  फलाने पार्टी के चम्मच मन रात के घुमत रहिस...
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