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जब कुछु आही

बुता काम बिना दाम, मिलय नही ये दुनिया ।लिखे पढ़े जेन कढ़े, ओही तो हे गुनिया ।।बने पढ़व बने कढ़व, शान-मान यदि चाही ।पूछ परख तोर सरख, होही जब कुछु आही...
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