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आदमी

आदमी आदमी होके आदमी पर न घात कर चल हॅस के हर किसी से बात कर क्या लेके आए हो, क्या लेके जाओगे दिल खोल के हर किसी से मुलाक़ात कर मांगता नहीं कोई तिजोरी किसी का मोहब्बत का खजाना ख़र्च इफरात कर रगो का लहू लाल है हर आदमी का मोहब्बत फैला नफ़रत से न मात कर मिट्टी का पुतला...

गरीबी

गरीबी यहां हर कोई गरीब, हर कोई अमीर है बस हाथों में अपनी उलझी हुई लकीर है देने वाले ने तो दिए, सब को दो ही हाथ कोई तकदीर से राजा तो कोई फ़कीर है हौसलों से भरो, उड़ान हर ख्वाबों की ईर्ष्या द्वेष तो सीने में चुभते हुए तीर है नश्वर दुनियां में हर सय मिट जानी है जो जान...

कठपुतली बनाके नचाया किसी ने

  कठपुतली बनाके नचाया किसी ने पानी में आग लगाया किसी ने बातों में हमको फसाया किसे ने किया कराया है किसी और का चालाकी से अपना बताया किसे ने लड़ते रहे हम बाहरी लोगों से भीतर से हमको सताया किसी ने हरदम बंधी रही आंखों में पट्टी देखा वही जो दिखाया किसी ने बेबसी बड़ी...

क्यों टांग अड़ाते हैं दूसरों के फटेले में

क्यों टांग अड़ाते हैं दूसरों के फटेले में खुद से बात करते हैं चलो अकेले में क्यों उलझें रहते हैं अक्सर झमेले में ना आंखों में निंद ना दिल में करार जुबां भी सामील है कड़वे करेले में क्या पाना और क्या खोना है दोस्तों गोबर ही मिलता है स्वार्थ के तबेले में अपने काम से काम...

नज़र आता है

नज़र आता है हंसी होठों से अनजान नज़र आता है हर कोई यहां परेशान नज़र आता है ये कैसा खुदगर्जी का दौर है यारों महफ़िल भी यहां विरान नज़र आता है हर कोई सर पे तनाव लिए फिर रहें है अब तो शर्द हवा भी तूफ़ान नज़र आता है टिकते नहीं पांव, अब जमीन पे अपने सभी को मंजिल आसमान नज़र...
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