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लोकतंत्र मा छूट हवे

आजादी हे बोलब के, तभे फूटत बोल ।सहिष्णुता के ढाल धऱे, बजावत हस ढोल ।।देश तोरे राज तोरे, अपन अक्कल खोल ।बैरी कोन काखर हवे, तहुँ थोकिन टटोल ।।जतका कर सकस कर बने, सत्ता के विरोध ।लोकतंत्र मा छूट हवे, कोनो डहर ओध ।।दाई असन हवय धरती, देश ला मत बाँट ।आनी-बानी बक बक के, माथा...
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