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मेला जाबो  (लावणी छंद )

    छन्न पकैया छन्न पकैया , धान पान सकलागे । राजिम सिरपुर खल्लारी मा , मेला तको भरागे ।1।   छन्न पकैया छन्न पकैया , चल ना मेला जाबो । करके गंगा स्नान हमूँ मन, भाग अपन सँहराबो ।2।   छन्न पकैया छन्न पकैया , मंदिर माँथ नवाबो । दर्शन करके शिव शंभू के , नरियर फूल चढ़ाबो ।3।...

पढ़बो-लिखबो आघू बढ़बो

लावनी छंद पढ़बो लिखबो जिनगी गढ़बो, ज्ञान हमू ला पाना हे। पढ़ लिख के हम साहब बनबो, रोज स्कूल मा जाना हे। घपटे हे अँधियारी जग मा, अज्ञानता मिटाना हे। दया मया के दीया धरके सुमता ला बगराना हे।। डी.पी.लहरे बायपास रोड़...

एकोठन सपना के टूटे, मरय न जीवन हर तोरे

(श्री गोपालदास नीरज  की कविता‘‘जीवन नही मरा करता‘‘ से अभिप्रेरित)लुका-लुका के रोवइयामन, कान खोल के सुन लौ रे ।फोकट-फोकट आँसु झरइया, बात मोर ये गुन लौ रे ।।हार-जीत सिक्का कस पहलू, राखे जीवन हर जोरे ।एकोठन सपना के टूटे, मरय न जीवन हर तोरे ।।सपना आखिर कहिथें काला,...
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