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हिन्दू मुस्लिम राग

रोला छंद मेरे अजीज दोस्त, अमर मै अकबर है तू । मै तो तेरे साथ, साथ तो हरपल है तू ।। रहना तुम सचेत, लोग कुछ हमें न भाये । हिन्दू मुस्लिम राग, छेड़ हम को भरमाये ।। मेरे घर के खीर, सिवइयां तेरे घर के । खाते हैं हम साथ, बैठकर तो जी भर के ।। इस भोजन का स्वाद, लोग वो जान न...

मेरा अपना गाँव

मेरा अपना गाँव   (रोला छंद) मेरा अपना गाँव, विश्‍व से न्यारा-न्यारा । नीत-रीत सब गाँव, लगे हैं प्यारा-प्यारा ।। काका बाबा होय, गाँव के बुजुर्ग सारे । हर सुख दुख में साथ, सखा बन काम सवारे ।। अमराई के छाँव, गाँव के छोरा-छोरी । खेले नाना खेल, करे सब जोरा-जोरी ।। ग्वाला...

एक श्रम थकीत नारी

एक श्रम थकीत नारी  (रोला छंद) बैठी गिट्टी ढेर, एक श्रम थकीत नारी । माथे पर श्रम श्‍वेद, लस्त कुछ है बेचारी ।। पानी बोतल हाथ, शांत करती वह तृष्‍णा । रापा टसला पास, जपे वह कृष्‍णा कृष्‍णा ।। पी लेती हूॅ नीर, काम है बाकी करना । काम काम रे काम, रोज है जीना मरना ।। मजदूरी...

रोला छंद – भाईदूज कथा

यमुना अरु यमराज, बहन भाई का नाता। यमराजा अति व्यस्त, नहीं मिल भगिनी पाता।-1 यमुना भ्राता नेह, नयन से नीर बहाती। भाई आओ द्वार, यही कह सदा बुलाती।-2 आया कार्तिक मास, दूज तिथि शुक्ल सुशोभन। पहुँचा बहना धाम, किया फिर सादर भोजन।-3 छलका निश्छल प्रीत, यमी ने मान बढ़ाई। भाई का...

समय हृदय के साफ

समय हृदय के साफ, दुवाभेदी ना जानय ।चाल-ढाल रख एक, सबो ला एके मानय ।पानी रहय न लोट, कमल पतरी मा जइसे ।ओला होय न भान, हवय सुख-दुख हा कइसे ।ओही बेरा एक, जनम कोनो तो लेथे ।मरके कोनो एक, सगा ला पीरा देथे ।।अपन करम के भोग, भोगथे मनखे मनखे ।कोनो बइठे रोय, हाँसथे कोनो तनके...
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