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शिव महिमा~रूपमाला छंद

*शिव महिमा (रूपमाला छंद 14+10)* ******************************** *शीश शशिधर गंग शोभित, शर्व शंभु सुरेश,* *शिव शुभंकर सौम्य शंकर, शेष शैव्य महेश।* *शंकरा शत शांकरी शुभ, शत्रुदमन शिवाय,* *शक्ति शाश्वत शीर्ष शैवी, शील अति शोभाय।*-1 *भूत भैरव भद्र भोले, भार्गवी भरतार,*...

रेलगाड़ी

रेलगाड़ी(रूपमाला छंद) रेलगाड़ी रेलगाड़ी रेलगाड़ी रेल। जे सवारी के लहू पीये समझ के तेल। टेम म आये नही न टेम मा पहुँचाय। दू मिनट लाँघे डहर घंटो खड़े रहि जाय। कोट करिया ओढ़ के कइथे टिकिट देखाव। वो सवारी के भला कइसे ग देखय घाव। हे ठसाठस भीड़ तभ्भो ले चढ़े सब पेल। रेलगाड़ी रेलगाड़ी...

रूपमाला: तुम किरण थी

तुम किरण थी मैं अँधेरा, हो सका कब मेल। खेल कर हर बार हारा, प्यार का ये खेल।। नैन उलझे और सपने , बुन सके हम लोग। आज भी लगता नही ये, था महज संजोग।। -मथुरा प्रसाद...

रूपमाला: मैं जला

मैं जला जलता रहा हूँ, रात भर अनजान। आप रोटी सेंक अपना, चल दिये श्रीमान।। मैं सहूँगा हर सितम को , मुस्कुराकर यार। आप ने मेरी मुहब्बत, दी बना बाजार।। -मथुरा प्रसाद...

राम जैसा राम जग में, दूसरा ना और

राम जैसा राम जग में, दूसरा ना और (रूपमाला छंद) राम जैसा राम जग में, दूसरा ना और । देश भारत देश जैसा, दूसरा ना ठौर ।। मानते तो है जहाँ पर, राम है अवधेश । किन्तु खुलकर बोलते ना, वाह रे ये देश ।। राम का वनवास कबतक, पूछते हैं लोग । देश है आजाद फिर भी, साध्य ना यह रोग ।।...
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