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पागा कलगी 3//राजेश कुमार निषाद

।।कलेवा।। छत्तीसगढ़ के कलेवा बढ़ सुघ्घर लागथे ग। आनि बानी के पकवान बने हे गजब के स्वाद आथे ग। खीर पुड़ी बड़ा सुहारी। घर म बनाये दीदी बहिनी अऊ महतारी। पड़ोसी घलो येकर गोठ गोठियाथे ग। आनि बानी के पकवान बने हे गजब के स्वाद आथे ग। ठेठरी खुरमी अऊ नमकीन के बात निराला हे। महर महर...

कज्जल छंद

  मनखे मनखे बने जोड़। भेद भाव ला अपन छोड़। आथे कतको राह मोड़। झन तैं सबले नता तोड़। सबला संगी अपन जान। झन कोनो मा भेद मान। दू दिन के सब सगा तान। एक सबो के हवय जान। माटी के तन हवय तोर। सुनले संगी गोठ मोर। रखले गठरी बाँध जोर। छूट जही कब प्राण तोर। भरम भेद के अपन खोल।...

छत्तीसगढ़ के पागा-5

छत्तीसगढ़ के पागा-5 मा ‘डोकरा’ विषय मा कविता लिखना रहिस । ये विषय मा ये रचना मन आय रहिन- 1-श्री नवीन कुमार तिवारी के रचना-  डोकरा बने जतन करो ग डोकरा के बने जतन करो ग ,, डोकरा के सन्मान करो ग , डोकरा होते विरासत समाज के , डोकरा होते सियनहा गवई समाज के , डोकरा के घु...

छत्तीसगढ के पागा-4

 काव्यांश अधारित जिनगी के तार ल जोर के तो देख माटी संग मया ल घोर के तो देख गुरतुर हो जाही संगी भाखा ह तोरो छत्तीसगढ़ी म थोकिन बोलके तो देख| -श्री राजकमल राजपूत ये आयोजन मा ऊपर दे गे श्री राजकमल राजपूत के पंक्ति के आधार मा अपन रचना लिखना रहिस- 1-शालिनी साहू के रचना तोर...

छत्तीसगढ के पागा-2

विषय- आतंकवादी 1-श्री नवीन कुमार तिवारी के रचना आतंक वादी पेपर अखबार में देखेव ब्रेकिंग न्यूज़ में देखेव आयना में देखेव , पानी में घलो धो के देखेव ,\ ऊपर डहीर ले देखेव \ बाहिर जाके देखेव न लाल ,न हरिहर ,नहीं पिउरी दिखिस मनखे दिखिस, सिरतोन बानी,\ हमरेच्च गांव के मनखे...
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