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नान्हे कहिनी-चढ़े बुखार

एक,…. दू, ……तीन ….., चवथैया बस घलो छूटगे ।  फेर सिवनाथ हा ब्इठेच रहिगे ।  का करय बिचारा !  देह हा अँगरा कस तीपत राँहय । लेहे देहे म राईपुर ले सिमगा तक आईस फेर बस बदले बर सिमगा के होटल म ब्ईठ गे ।  मन ता कहय अब आही तेन गाडी म जरुर जाहू फेर तन हा...

सुरता

देख के तै मोला मुचमुचाये रेहे । आँखी आँखी म तै गोठीयाये रेहे ।। बन बराती मैहा गेये रेहेव तोर गांव । गीत गोई भडवनी तै गाये रेहे ।। ब्इठे रेहेव मै मडवा म सँगी मन सँग । सरबत कहिके नून पानी पीयाये रेहे ।। परे रेहेव मैं पँगत के तोर पार मा । परोसा परोसा परूस के खवाये रेहे...
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