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चुनावी होली

चुनावी होली (सरसी छंद) जोगीरा सरा ररर रा वाह खिलाड़ी वाह. खेल वोट का अजब निराला, दिखाये कई रंग । ताली दे-दे जनता हँसती, खेल देख बेढंग ।। जोगी रा सरा ररर रा, ओजोगी रा सरा ररर रा जिनके माथे हैं घोटाले, कहते रहते चोर । सत्ता हाथ से जाती जब-जब, पीड़ा दे घनघोर ।। जोगी रा सरा...

छंद के शिल्प विधान

आपमन ला जान के खुशी होही के छंद हर हमर छत्तीसगढ़ मा जनमे हवय । हमर छत्तीसगढ़ मा आदिकवि महर्षि बाल्मिकी के आश्रम रहिस, एक दिन ओ हर सारस चिरई के जोडा ला प्रेम अलाप करत देखिस ओखर देखते देखत एक झन शिकारी हा ओमा के नर सारस ला मार दिस, तेखर दुख मा मादा सारस हा रोय लगिस ओला...

पहिली मुरकेटव, इखर टोटा

पहिली मुरकेटव, इखर टोटा (द्वितीय झूलना दंडक छंद) एक खड़े बाहिर, एक अड़े भीतर, बैरी दूनों हे, देष के गा । बाहिर ले जादा, भीतर के बैरी, बैरी ले बैरी, देष के गा ।। बाहिर ला छोड़व, भीतर ला देखव, पहिली मुरकेटव, इखर टोटा । बाहिर के का हे, भीतर ला देखत, पटाटोर जाही, धरत लोटा ।।...

नान्हे कहिनी- ‘‘राष्ट्र के सेवक’’

नान्हे कहिनी- ‘‘राष्ट्र के सेवक’’ (मूल कहानी- राष्ट्र का सेवक, मूल कहानीकार-मुंशी प्रेमचंद) राष्ट्र के सेवक हा कहिस- देश के मुक्ति के एके उपाय हे अउ वो हे ओ मनखे के संग जेला नीच कहे गीस के संग भाईचारा रखना, परे-डरे के संग बराबरी के बर्ताव करना । दुनिया मा सबो भाई-भाई...

ग़ज़ल -रमेश चौहान

खफा मुहब्बते खुर्शीद औ मनाने से, फरेब लोभ के अस्काम घर बसाने से । इक आदमियत खफा हो चला जमाने से, इक आफताब के बेवक्त डूब जाने से । नदीम खास मेरा अब नही रहा साथी, फुवाद टूट गया उसको अजमाने से । जलील आज बहुत हो रहा यराना सा..ब वो छटपटाते निकलने गरीब खाने से । असास हिल...
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