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ग़ज़ल -रमेश चौहान

खफा मुहब्बते खुर्शीद औ मनाने से, फरेब लोभ के अस्काम घर बसाने से । इक आदमियत खफा हो चला जमाने से, इक आफताब के बेवक्त डूब जाने से । नदीम खास मेरा अब नही रहा साथी, फुवाद टूट गया उसको अजमाने से । जलील आज बहुत हो रहा यराना सा..ब वो छटपटाते निकलने गरीब खाने से । असास हिल...

का फायदा हे बता अइसन सियानी के

का फायदा हे बता अइसन सियानी के का फायदा हे बता अइसन सियानी के मरत हे मछरी तरिया म बिन पानी के धान के कटोरा छत्तीसगढ़ ल कहिथे फेर का दुख ल बतान इंहा किसानी के कतेक किसान फांसी के फंदा म झुल गे कोन सुध लिही भईया हमर परसानी के करजा के पानी मुड़ी ले ऊप्पर होगे छप्परी घलो...

मेमन मुक्तक

जवानी से मेरी न टकराइएगा, खुदा की कसम वरना पछताइएगा मुझे मेरी फितरत में मस्ती मिलती है यूँ छेड़ कर न खफा कीजिइएगा । -स्वा अब्बदुल गफ्फार खान...

कोहिनूर के दाम हो जाएगा

मेंहनत करते रहो एक दिन नाम हो जाएगा। मनचाहा तुझको हासिल मुकाम हो जाएगा।   रंजिश भरी इस जमाने मे घुल न जाना तुम, आग सी फैलती बाते है बदनाम हो जाएगा।   तिमिर चिर रौशन कर जमी को रवि बनकर, बदल दे आलम खुशनुमा अंजाम हो जाएगा।   तमन्ना ए ता उम्र आसमां मे उड़ने...
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