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मेमन मुक्तक

जवानी से मेरी न टकराइएगा, खुदा की कसम वरना पछताइएगा मुझे मेरी फितरत में मस्ती मिलती है यूँ छेड़ कर न खफा कीजिइएगा । -स्वा अब्बदुल गफ्फार खान...

कोहिनूर के दाम हो जाएगा

मेंहनत करते रहो एक दिन नाम हो जाएगा। मनचाहा तुझको हासिल मुकाम हो जाएगा।   रंजिश भरी इस जमाने मे घुल न जाना तुम, आग सी फैलती बाते है बदनाम हो जाएगा।   तिमिर चिर रौशन कर जमी को रवि बनकर, बदल दे आलम खुशनुमा अंजाम हो जाएगा।   तमन्ना ए ता उम्र आसमां मे उड़ने...

आदमी

स्व. अब्दुल गफ्फार खान मेमन गजल-आदमी खा रहा है, पी रहा है, सो रहा है आदमी रोटियाँ ही रोटियाँ बस बो रहा है आदमी काटता ही जा रहा है जंगलों की भीड़ को और गमलों से ही हरा हो रहा है आदमी ये जमीं तो होती थी, फूलों के वास्ते इसी जमीं पर आज कांटे, बो रहा है आदमी जिस कदर रोना...

मुक्तक (बेटी)

मुक्तक (बेटी) पढ़े लिखे के उमर मा, बेटी बिनत हे कचरा। ये गरीबी ला देख के, हिरदे होगे पखरा।। बेटी पढ़ाव बेटी बचाव, ये बात हा होगे बदरा। पढ़े लिखे के उमर मा, बेटी बिनत हे कचरा।। कहिथें लक्ष्मी होथे बेटी, नइ पाइस दाई के अँचरा। पढ़े लिखे के उमर मा, बेटी बिनत हे कचरा।। खाय...
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