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ये गांव ए

सुन गोठ ला, ये गांव के। ये देश के, आें ठांव केजे देश के, अभिमान हे । संस्कार के पहिचान हेपरिवार कस, सब संग मा, हर बात मा, हर रंग माबड़ छोट सब, हा एक हे । हर आदमी, बड़ नेक हेदुख आन के, जब देखथें । निज जान के, सब भोगथेजब देखथे, सुख आन के । तब नाचथे, ओ तान केहर रीत ला, सब...

गांव

मधुमालती छंदसुन गोठ ला, ये धाम के। पहिचान हे, जे काम केहम आन के, खाये सुता । धर खांध ला, करथन बुताछोटे बड़े, देथे मया । सब आदमी,  करथे दयासुख आन के, मन मा धरे । दुख आन के, सब झन भरेकाकी कका, भइया कहे । दाई बबा, सब बर सहेहर बात ला, सब मानथे । सब नीत ला, भल जानथेचल...
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