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पाके नर तन तू अगर

पाके नर तन तू अगर…. ताल -रूपक पाके नर तन तू अगर बिसरा गये भगवान को दुनियाबी मस्ति में आकर भुल गये येह शान को । पद तुमको चौरासी के बंधन से छुड़े के नर तन जो दिया तू मिलादी मिट्टी में मूरख तू अपने आन को पाके नर तन तू अगर…. पद- भटका खाकर आये हो, वे याद तुमको...

गयल में भेट भइले ना

गयल में भेट भइले ना ताल, -दादरा सखि कान्हां हमार अलबेले गयल में भेंट भइले ना नहीं साथ में न उनके चेले गयल में भेंट भइले ना पद आंचल पकड़ मोहे पूछत कान्हां पूछत कान्हां हां पूछत कान्हा कहां राधा गयो है मेरो गयल में भेंट भइले ना पद मैं बोली अजी छोंड़ अंचरवा छोड़ अंचरवा हां...

मन जग फूलवरिया में

मन जग फूलवरिया में ताल-दादरा मुखड़ा- मन जग फूलवरिया में भंवरा क्यों बन गया है नहीं सोंचता तू आगे गवांरा क्यों बन गया है ।। मन जग फूलवरियां में… पद 1- है कितने रंग बिरंगे कलियों में गुल खिले हैं पी-पी के रस तुम आते बगियां खूब झूमे हैं होगी कभी ये पतझड़ बहरा क्यों...

ये मन कहां तू जायेगा

ये मन कहां तू जायेगा ताल-रूपक ये मन कहां तू जायेगा थकता नहीं कुछ भी जरा कब तक भटकते जायेगा रूकता नहीं तू भी जरा पद कभी इस जगह कभी उस जगह कभी आसमां करे सैर है कहीं रिस्ते-नाते बना रखे किसी और को कहे गैर है । पर भी न तुझको है पता पूछता नहीं कुछ भी जरा ये मन कहां तू...

भजन-अरे मन चल यहां से दूर

अरे मन चल यहां से दूर जहाँ में दिल नहीं भरता है सब में सब जगह भरपूर जिससे है काल भी डरता पद-1 न है कुछ सार यह जग में, नहीं कुछ भी ठीकाना है ऐ है वो नगरी जादू का यहां रो-रो बिताना है न सुख-दुख भय न मायूसी जो मस्तों ने वहीं रहता अरे मन चल यहां से दूर पद-2 न सूरज-चाँद की...
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