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सरग-नरक

सरग-नरक हा मनोदशा हे, जे मन मा उपजे ।बने करम हा सुख उपजाये, सरग जेन सिरजे ।।जेन करम हा दुख उपजाथे, नरक नाम धरथे ।करम जगत के सार कहाथे, नाश-अमर करथे ।।बने करम तै काला कहिबे,  सोच बने धरले ।दूसर ला कुछु दुख झन होवय, कुछुच काम करले ।।दूसर बर गड्ढा खनबे ता, नरक म तैं...

जात.पात ला छोड़व कहिथे

जात.पात ला छोड़व कहिथे, गिनती जे करथे ।बाँट-बाँट मनखे के बोटी, झोली जे भरथे ।।गढ़े सुवारथ के परिभाषा, जात बने कइसे ।निरमल काया के पानी मा, रंग घुरे जइसे ।।अगड़ी पिछड़ी दलित रंग के, मनखे रंग धरे ।रंग खून के एक होय कहि, फोकट दंभ भरे ।जात कहां रोटी-बेटी बर, कहिथे जे मनखे...
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