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तोर आँखी के दहरा

नवगीत तोर आँखी के दहरा, मया करे हिलोर बिना बोले बोलत रहिथस बिना मुँह खोले । बिना देखे देखत रहिथस आँखी मूंदे होले-होले मोर देह के छाया तैं प्राण घला तैं मोर रूप रंग ला कोने देखय तोर अंतस हे उजयारी मोरे सेती रात दिन तैं खावत रहिथस गारी बिना छांदे छंदाय हँव तोर मया के...

खून पसीना मा झगरा हे

खून पसीना मा झगरा हे,परे जगत के फेरबने-बुनाये सड़क एक बर,सरपट-सरपट दउड़े ।एक पैयडगरी गढ़त हवेअपन भाग ला डउडे़ ।। (डउड़ना-सवारना)केवल अधिकार एक जानय,एक करम के टेरजेन खून के जाये होथे,ओखर चस्मा हरियर ।जेन पसीना ला बोहाथे,ओखर मन हा फरियर ।।एक धरे हे सोना चांदी,दूसर कासा नेर...

बरखा ला फोन करे हे

नवगीतमोर गांव के धनहा-डोली,बरखा ला फोन करे हे ।तोर ठिठोली देखत-देखत,छाती हा मोर जरे हे ।।रोंवा-रोंवा पथरा होगे,परवत होगे काया ।पानी-माटी के तन हा मोरेसमझय कइसे मायाधान-पान के बाढ़त बिरवा,मुरछा खाय परे हेएको लोटा पानी भेजव,मुँह म छिटा मारे बरकोरा के लइका चिहरत हे,येला...

काबर डारे मोर ऊपर गलगल ले सोना पानी

काबर डारे मोर ऊपर,गलगल ले सोना पानीनवा जमाना के चलनताम-झाम ला सब भाथेंगुण-अवगुण देखय नहीरंग-रूप मा मोहाथेंमैं डालडा गरीब के संगीगढ़थव अपन कहानीचारदीवारी  के फइका दिन ब दिन टूटत हेलइका बच्चा मा भूलायेदाई-ददा छूटत हेमैं अढ़हा-गोढ़हा लइकादाई के करेजाचानीसंस्कृति अउ...
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