Select Page

एक रही हम मनखे जात

तोर मोर हे एके जात, दूनों हन मनखे प्राणी ।नेक सोच ला अंतस राख, करबो गा हमन सियानी ।।तोर मोर ले बड़का देश, राखब हम एला एके ।नो हन कोनो बड़का छोट, बुरा सोच देथन फेके ।।अगड़ी-पिछड़ी कइसन जात, अउ ये दलित आदिवासी ।बांट रखे  हमरे सरकार, इही काम हे बदमासी ।।वोट बैंक पर राखे...
error: