Select Page

कंजूस खोपड़ी

छत्तीसगढ़ी व्यंग -कंजूस खोपड़ी हद सबो के होथे। बिगर हद के पहिचान नइ बनय। ओकरे सेती अति ल जम्मो जघा बरजे गे हे। हद ले जादा होए ले नुकसाने होथे। फइदा के बाते झन सोचय। जे अन ल बिन खाए मनखे जीए नइ सकय। उही ल हद ले जादा खाए म खटिया धर लेथे। त अउ दूसर जिनिस के तो बाते छोड़ दे।...
error: