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बसंत-दोहा

बसंत-दोह अइलाये तन मा जगे, मनहर प्रीत अनंत। सूट बूट पहिरे बने, आगे ऋतु बसंत।। डारा मन उलहोत हे, हरियर हरियर पान। बुढ़वा बुढ़वा रूख मन,होवत हवे जवान।। मउहा के खुश्बू धरे , अपने ओली झार। पगली पुरवइया चले,लड़भड़ लड़भर खार।। जंगल जंगल सुरमई, जंगल जंगल प्रीत। आमा मउरे डार...

पर्यावरण बचाओ

  पर्यावरण बचाओ (दोहा छंद) पेड़ लगाओ मिल सभी, मिलती है जी छाँव । शुद्ध हवा पानी मिले , सुंदर लगते गाँव ।।1।। पेड़ों से मिलती हमें , औषधि लकड़ी फूल । गाँव गली में छोरियाँ , रस्सी बाँधे झूल ।।2।। पर्यावरण विनाश से, मरते हैं सब लोग । कहीं बाढ़ सूखा कहीं, जीव रहे हैं...

एक गौरैया का प्रश्न

एक मनुज से पूछती, गौरैया ये बोल । बुद्धिमान प्राणी कहो, मेरे जीवन मोल ।। तुम अपने हर प्रगति को, अब तो लो कुछ तोल । धरती के कण-कण मनुज, जहर दिये हो घोल ।। क्या हम कर सकते नहीं, चीं-चीं कल-कल्लोल । तेरे सिंचित विष जहर, करते क्रिया कपोल ।। क्या हम भी इस सृष्टि में, करें...

शिक्षक दिवस  (दोहावली )

शिक्षक दिवस  (दोहावली )   आज हवय पावन दिवस , गुरु पूजा त्योहार । वंदत हँव गुरु के चरण , शीश नवाँ सौ बार ।।   राधा कृष्णन ला नमन,  जन्म दिवस हे आज । शिक्षक जन जेकर उपर , करथें अबड़े नाज ।।   जेन रहिंन चिंतक बड़े , राजनीति के संत । बनिन राष्ट्रपति दूसरा , भारत के श्रीमंत...

गोवर्धन (दोहावली )

गोवर्धन (दोहावली )   गो का वर्धन हो सदा, दूध दही मिल जाय । उर्वर गोबर खाद से, खेत फसल लहराय ।।   खेत फसल लहराय जी, रहे बिमारी दूर। कोठी छलके धान से, नाचे चना मसूर ।।   नाचे चना मसूर जी, जब हल खींचे बैल। ट्रैक्टर का गंदा धुआँ, बहुत छोड़ता मैल।।   बहुत छोड़ता मैल जी,...
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