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छत्तीसगढ़ के पागा-5

छत्तीसगढ़ के पागा-5 मा ‘डोकरा’ विषय मा कविता लिखना रहिस । ये विषय मा ये रचना मन आय रहिन- 1-श्री नवीन कुमार तिवारी के रचना-  डोकरा बने जतन करो ग डोकरा के बने जतन करो ग ,, डोकरा के सन्मान करो ग , डोकरा होते विरासत समाज के , डोकरा होते सियनहा गवई समाज के , डोकरा के घु...

लाल हुये है नंद को

लाल हुये है नंद को, हुये नंद को लाल । बाजा बाजे गह गहे, नभ में उड़े गुलाल ।। ब्रज गोकुल में आज तो, उमंग करे हिलोर । गली गली हर द्वार में, मचा हुआ है शोर ।। ग्वाल संग ग्वालन हर्षित, मिला रही हैं ताल ।। लाल हुये…. गोद यशोदा हॅस रहा, गोकुल राज दुलार । निरख निरख मां...

कइसे जी भगवान

जर भुंजा गे खेत मा, बोये हमरे धान ।तन लेसागे हे हमर, कइसे जी भगवान ।।तरसत हन हम बूंद बर, धरती गे हे सूख ।बरस आय ये तीसरा, पीयासे हे रूख ।।ठोम्हा भर पानी नही, कइसे रखब परान ।तन लेसागे हे हमर, कइसे जी भगवान ।।खेत-खार पटपर परे, फूटे हवय दरार ।नदिया तरिया नल कुँवा, सुख्खा...

लगत जेठ कस चइत हा

लगत जेठ कस चइत हा, कइसन घाम जनाय ।अइसे कइसे होत हे, कोने आज बताय ।।बड़े बिहनिया देख तो, हे चर चर ले घाम ।गरम गरम लागे हवा, कइसे करबो काम ।हवय काम कोठार मा, बैरी घाम सताय ।।लगत जेठ कस चइत हा…तरिया नरवा अउ कुॅवा, बइठे हे बिन काम ।बंद होत हे बोर हा, छोड़े अपने नाम...

बैरी कोने देश के, कोने हवय मितान

बैरी कोने देश के, कोने हवय मितान ।देखव आंखी खोल के, मनखे के पहिचान ।अपने कुरिया अपन हे, पर के हा बेकार ।बासी चटनी चाट लव, झन बोहावव लार ।।मुसवा बन के छेद मत, अपने कोठी धान । बैरी कोने देश के….भड़वा बरतन चार ठन, करे भले हे शोर ।टोरव फोरय ना कभू, कोनो एको कोर...
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