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दीप छंद

-दीप छंद- जेन चरणन चार । धरय जब दस भार नगण गुरू लघु अंत । दीप गढ़ बलवंत दीप गुरतुर होय । मन मा सुख समोय ‘गढ़‘  के करब गोठ । हमन जुरमिल पोठ जइसे- सुन लौ सब सुजान । देके अपन कान हे भगवत पुराण । जेखर अपन मान घीव असन लुकाय । कृष्ण रहय समाय जे लेवय बिलोय । अपन मन ल धोय पाहि...

एक रहव न यार

दाई हमर आय । जेखर हमन जायछत्तीसगढ़ मोर । देखव सब निटोरहे जंगल पहाड़ । कइसन कइसन झाड़नदिया नहर धार । धनहा अउ कछारकाजर असन कोल । काहेक अनमोलहीरा धर खदान । बइठे हन नदानमाटी म धनवान। छत्तीसगढ़ जानलूटे बर ग आय । रूप अपन बनायझोला अपन खांध । आये रहिन बांधआके ग परदेष  । ओमन...
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