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सुन रे भोला

सुन रे भोल (त्रिभंगी छंद) बनव-बनव मनखे, सबझन तनके, माटी कस सनके, बाँह धरे । खुद ला पहिचानव, खुद ला मानव, खुद ला सानव, एक करे ।। ईश्वर के जाये, ये तन पाये, तभो भुलाये, फेर परे । तैं अलग मानथस, खुद ल जानथस, घात तानथस, अलग खड़े ।। तैं कनिहा कस के, आघू धस के, लाठी धर ले,...

बढ़े महंगाई

त्रिभंगी छंद बढ़े महंगाई, करे कमाई, जो जमाखोर, लोभ भरे । सरकारी ढर्रा, जाने जर्रा, है सांठ गांठ, साथ खड़े ।। अब कौन हमारे, लोग पुकारे, जो करे रक्षा, हाथ धरे । मंत्री सरकारी, धनी व्यपारी, साथ हमारे, छोड़ खड़े ।। -रमेशकुमार सिंह...

ये बरखा रानी विनती सुनलव

ये बरखा रानी, सुनव कहानी, मोर जुबानी, ध्यान धरे ।तोरे बिन मनखे, रहय न तनके, खाय न मनके, भूख मरे ।।बड़ चिंता करथें, सोच म मरथे, देखत जरथे, खेत जरे ।कइसे के जीबो, काला पीबो, बूंद न एको, तोर परे ।।थोकिन तो गुनलव, विनती सुनलव, बरसव रद्-रद्, एक घड़ी ।मानव तुम कहना, फाटे...

भौजी

ये सुक्सा भाजी, खाहव काजी, पूछय भौजी, साग धरे  ।ओ रांधत जेवन, खेवन-खेवन, डारत फोरन, मात करे ।।ओखर तो रांधे, सबो ल बांधे, मया म फांदे, जोर मया ।जब दाई खावय, हाँस बतावय, बहुत सुहावय, देत दया...
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