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उठव जागव अब छत्तीसगढ़ीया

  “उठव जागव अब छत्तीसगढ़ीया” उठो रे…. जागो रे…2 उठव जागव अब छत्तीसगढ़ीया, चलो करबो नवा बिहान ग। सेवा ल बजाबो धरती दाई के, सबो मिलके लइका सियान ग। परदेसिया मन सब आके इहाँ, बने बइठे हे बघुआ रे। सबो जिनीस ल उही हबकत हे, जाके हमर ले अघुआ रे।...

अपनी कलम की नोक से

अपनी कलम की नोक से, क्षितिज फलक पर, मैंने एक बिंदु उकेरा है । अभी भरने है कई रंग, इस क्षितिज फलक पर, लेखनी को तो अभी हाथ धरा है । डगमगाते पाँव से, अंधेरी डगर पर, चलने का दंभ भरा है । निशा की तम पर ही, चलना है उस पथ पर, जिस पथ पर नई सबेरा है । राही कोई और हो न सही,...

पढ़े लिखे अड़हा

छत्तीसगढ़ी कविता पढ़हे लिखे अड़हा ,अउ अड़हा हुसियार होगे न …. अउ जेला समझेंन जवार ओ कुसियार होगे न जतके पढ़े लिखे ओतके अंगूठा ल हलात हे अउ कहा गवागे नेटवर्क कहिके चिल्लात हे  अउ जेला समझेंन गउँटिया ओ मुक्तियार होंगे न अउ पड़े लिखे…………….....

उड़ान

कदम मिला कर साथ मेरे ,गर चलना है तो आगे आ । अंधियारों में दीपक बनकर, जलना है तो आगे आ ।। कब तक डर कर यूं कपेगा, कितना खतरा यूं भपेगा। निर्भय बनकर तोड़ जंजीरे, कुछ करना होतो आगे आ।। माता – पिता ने बहुत किया है, उनका नाम बढ़ाना है। कुलदीपक बनकर दुनिया के, अंधियारों...

पूजनीय पिताजी को पैगाम

पूजनीय पिताजी को पैगाम पूजनीय पिताजी, सादर प्रणाम आपके चरण ही है मेरे लिए धाम आपके आशीष से हो रहें हैं पूरे काम सदा ऊंचा रखूंगा आपका मैं नाम आपसे जो पाया है, आदर्श तमाम तो सुगम हो गई है हर राहें मुकाम सादा जीवन है, नहीं है ताम-झाम राह दिखातें हैं श्री पुरूषोत्तम राम...
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