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धरे उदासी बोलय जमुना घाट

धरे उदासी बोलय जमुना घाट ।कती हवय अब छलिया तोरे बाट ।।नाग कालिया कई-कई ठन आज ।मोरे पानी मा करत हवय राज ।।कहां लुका गे बासुरीवाला मोर ।कहां लुका गे तैं मोहन चितचोर ।।घाट घठौंदा मोर भटत हे जात ।काबर अब तैं इहां नई तो आत...
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