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मुक्तक (बेटी)

मुक्तक (बेटी) पढ़े लिखे के उमर मा, बेटी बिनत हे कचरा। ये गरीबी ला देख के, हिरदे होगे पखरा।। बेटी पढ़ाव बेटी बचाव, ये बात हा होगे बदरा। पढ़े लिखे के उमर मा, बेटी बिनत हे कचरा।। कहिथें लक्ष्मी होथे बेटी, नइ पाइस दाई के अँचरा। पढ़े लिखे के उमर मा, बेटी बिनत हे कचरा।। खाय...

पढ़बो-लिखबो आघू बढ़बो

लावनी छंद पढ़बो लिखबो जिनगी गढ़बो, ज्ञान हमू ला पाना हे। पढ़ लिख के हम साहब बनबो, रोज स्कूल मा जाना हे। घपटे हे अँधियारी जग मा, अज्ञानता मिटाना हे। दया मया के दीया धरके सुमता ला बगराना हे।। डी.पी.लहरे बायपास रोड़...

गाँव

गाँव  (बरवै छन्द) सुग्घर लागत हावय,हमरो गाँव। बर पीपर के ठंडा,पावन छाँव।। नदिया नरवा बोहत,हावय धार। हरियर हरियर दिखथे,खेती खार।। कोयल कुहके कउँवा,करथे काँव। सुत उठ सब धरती के,परथें पाँव।। करथें सबो किसानी,पाथें धान। मारय नइ जी कोनो,शेखी शान।। महिनत के बदला मा,पाथें...
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