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चोवा राम “बादल” के छप्पय छंद

              1 बासी बासी खाय सुजान , ज्ञान ओकर बढ़ जावय । बासी खाय किसान ,पोठ खंती खन आवय । बासी पसिया पेज , हमर सुग्घर परिपाटी । बासी ला झन हाँस ,दवा जी एहा खाटी । बासी दवई बन जथे , रतिहा बोरे भात हा । पी पसिया लू नइ धरय , हवा झाँझ के तात हा ।।        2  पुरखा मन के...

सत्यमेव जयते सृष्टि में, शंका ना लवलेश है

//छप्पय छंद// सत्य नाम साहेब, संत कबीरजी कहते । राम नाम है सत्य, अंत पल हम सब जपते ।। करें सत्य की खोज, आत्म चिंतन आप करें । अन्वेषण से प्राप्त, सत्य को ही आप वरें ।। शाश्वत है सत्य नष्वर जग, सत्य प्रलय में शेष है । सत्यमेव जयते सृष्टि में, शंका ना लवलेष है ।। असत्य...

कब समझोगे मर्म रे

कब समझोगे मर्म रे (छप्पय छंद) हिन्दू मुस्लिम राग, छोड़ दे रे अब बंदे । कट्टरता को छोड़, छोड़ सब गोरख धंधे ।। धर्म पंथ का काज, करे पावन तन मन को । पावन पवित्र स्नेह, जोड़ती है जन जन को ।। राग द्वेष को त्याग कर अब, कर ले सब से प्रेम रे । मानव मानव सब एक है, कब समझेगा मर्म...

करम तोर पहिचान हे

अपने ला पहिचान, देह हस के तैं आत्मा ।पाँच तत्व के देह, जेखरे होथे खात्मा ।।देह तत्व ले आन, अमर आत्मा हा होथे ।करे देह ला यंत्र, करम फल ला वो बोथे ।।रंग-रूप ला छोड़ के, करम तोर पहिचान हे ।मनखेपन ला मान,  तोर येही अभिमान हे...

कइसे भरही भेट

कइसे भरही भेट, हाथ मा हाथ धरे ले ।काम बुता ला देख, मने मन तोर जरे ले ।तर तर जब बोहाय, पसीना  देह म तोरे ।चटनी मिरचा नून, सुहाही बासी बोरे ।फुदक फुदक चिरई घला, दाना पानी खोजथे ।जंगल के बघवा कहां, बइठे बइठे बोजथे...
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