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मैं चांद अमावस का

मैं चांद अमावस का, मुस्किल से दिखता हूं। इंसा हूं, रचना रब की, सच्चाई को लिखता हूं॥ बेमंजिल सफर पर  निकलूं, मेरी फितरत नहीं है, मैं गिरकर नहीं संभलता, मैं चलकर सिखता हूं॥ देकर लेना, लेकर देना, ये तो सौदागरी है, बंजारा बादल हूं, देकर न सिसकता हूं॥ सौ जन्मों के रफ्ता...
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