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ये हँसी ठिठोली

ये हँसी ठिठोली, गुरूतुर बोली, मोरे अंतस खोले ।ये कारी आँखी, हावय साखी, मोरे अंतस डोले ।।जस चंदा टुकड़ा, तोरे मुखड़ा, मोरे पूरणमासी ।मन कुहकत रहिथे, चहकत रहिथे, तोरे सुन-सुन हाँसी...
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