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उठव जागव अब छत्तीसगढ़ीया

  “उठव जागव अब छत्तीसगढ़ीया” उठो रे…. जागो रे…2 उठव जागव अब छत्तीसगढ़ीया, चलो करबो नवा बिहान ग। सेवा ल बजाबो धरती दाई के, सबो मिलके लइका सियान ग। परदेसिया मन सब आके इहाँ, बने बइठे हे बघुआ रे। सबो जिनीस ल उही हबकत हे, जाके हमर ले अघुआ रे।...

कर लेबे चिनहारी हमरो

“कर लेबे चिनहारी हमरो” कर लेबे चिनहारी हमरो, हे गौरी के लाल। करत हावन तोरले बिनती, धरके पूजा थाल। सबो पहिली तोला मनाथे, जग के नर-नारी ग। मन मांगे आसिस वो पाथे, आथे जे दुआरी ग। भर देबे हमरो भी झोली, आसिस येमा डाल। कर लेबे चिनहारी हमरो, हे गौरी के लाल।।1।।...

साहित्यश्री-1//गुमान प्रसाद साहू

करते हैं वंदन हम सब तुम्हारे, हे प्रथम पूज्य गणेश। आये हैं शरण में हाथ पसारे, काटो हमारे सब क्लेष। शिव पार्वती के तुम हो दूलारे, करते हो मूषक सवारी। एकदंत तुम गज आनन धारे, मोदक है तुमको प्यारी। लम्बोदर तुम हो मंगलकर्ता, कहलाते हो तुम्ही विघ्नेश। करते हैं वंदन हम सब...
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