Select Page

देखव शहर के गाँव मा

देखव शहर के गाँव मा, एके दिखे हे चाल ।।परदेश कस तो देश हा, कइसे कहँव मैं हाल।।अपने अपन मा हे मगन, बड़का खुदे ला मान ।मतलब कहां हे आन ले, अपने अपन ला तान ।।फेशन धरे हे आन के,  अपने चलन ला टार ।अपने खुशी ला देखथे, परिवार ला तो मार ।।दाई ददा बस पोसथे, लइका अपन सिरजाय...
error: