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हमर किसानी, बनत न थेगहा

मिलत हवय ना हमर गांव मा, अब बनिहार गा ।कहँव कोन ला सुझत न कूछु हे, सब सुखियार गा ।।दिखय न अधिया लेवइया अब, धरय न रेगहा ।अइसइ दिन मा हमर किसानी, बनय न थेगहा...
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