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गंग छंद

-गंग छंद- हे चरण चारे । नौ भार धारे नौ गंग भाखे । गुरू अंत राखे जइसे- मन श्याम राखे । शुक व्यास भाखे सुन एक बेरा । ऋषि करिन डेरा हरि क्षेत्र आके । सब जुरीयाके भगवान पाये । यज्ञे रचाये कर सूत पूजा । विधि कई दूजा सब हाथ जोरे । मन गांठ छोरे शुभ प्रश्न पूछे । मन जेन रूचे...

हे काम पूजा

तैं बात सुन्ना । अउ बने गुन्नाजी भर कमाना । भर पेट खानाये पूट पूजा । ना करे दूजाजीनगी जीबे । जब काम पीबेबिन काम जोही । का तोर होहीहे पेट खाली । ना बजे तालीये एक बीता । हे रोज रीतातैं भरे पाबे । जब तैं कमाबेपरिवार ठाढ़े । अउ बुता बाढ़ेना हाथ पैसा । परिवार कैसाजब जनम पाये...

पेट के पूजा

पेट बर जीना । मौत रोजीनापेट भर खाना । जी भर कमानापेट के चिंता । करथे मुनिंताकहां ले पाबे । कइसे कमाबेजब जनम पाये । दाई पियायेदूध म अघाये । पिये बउरायेथोरकुन बाढ़े । अॅंगना म माढ़ेमुॅह ला जुठारे ।  दाई सवारेखाई खजेना । हाथ भर लेनाददा जब देथे । गोदी म लेथेलइका कहाये...
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