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अंगाकर रोटी

कुण्डलियां अंगाकर रोटी कड़क, सबला गजब मिठाय । घी-शक्कर के संग मा, सबला घात सुहाय ।। सबला घात सुहाय, ससनभर के सब खाथे । चटनी कूर अथान, संग मा घला सुहाथे ।। तहुँहर खाव ‘रमेश’, छोड़ के सब मसमोटी । जांगर करथे काम, खात अंगाकर रोटी ।। अंगाकर रोटी बनय, कइसे तहुँहर जान । सान...

बेजाकब्जा

बेजाकब्जा हा हवय, बड़े समस्या यार । येहू एक प्रकार के, आवय भ्रष्चाचार ।। आवय भ्रष्टाचार, जगह सरकारी घेरब । हाट बाट अउ खार, दुवारी मा आँखी फेरब ।। सुनलव कहय रमेश, सोच के ढिल्ला कब्जा । जेलव देखव तेन, करत हे बेजा कब्जा ।। चारों कोती देश मा, हवय समस्या झार । सबो समस्या...

आसों के जाड़

आसों के ये जाड़ मा, बाजत हावय दांत । सुरूर-सुरूर सुर्रा चलत, आगी घाम नगांत ।। आगी घाम नगांत, डोकरी दाई लइका । कका लमाये लात, सुते ओधाये फइका ।। गुलगुल भजिया खात, गोरसी तापत हासों । कतका दिन के बाद, परस हे जाड़ा आसों ।। छाये हावय धुंधरा, चारो डहर घात । बेरा चढ़ गे हे सरग,...

गणपति गणराज (कुण्डलिया छंद)

 हे गणपति गणराज जी , बिनती हे कर जोर । अँगना हमर बिराज लव, पइँ hया लागँव तोर ।। पइँया लागँव तोर , अबड़ जोहत हँव रस्ता । आके नाथ उबार , मोर हालत हे खस्ता ।। मँहगाई के मार , बाढ़ कर देहे दुरगति । भ्रष्टाचार के टाँग , टोर दव झटकुन गणपति ।।1   बड़का बड़का कान हे , बड़का हावय...

सोच रहा हूँ क्या लिखूँ

  सोच रहा हूँ क्या लिखूँ, लिये कलम मैं हाथ । कथ्य कथानक शिल्प अरू, नहीं विषय का साथ ।। नहीं विषय का साथ, भावहिन मुझको लगते । उमड़-घुमड़ कर भाव, मेघ जलहिन सा ठगते ।। दशा देश का देख, कलम को नोच रहा हूँ । कहाँ मढ़ू मैं दोष, कलम ले सोच रहा हूँ ।। सदियों से तो स्वार्थ...
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