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अपनों को ही ललकारो

जो पाले अलगाववाद को, उसको हमने ही पाला । झांके ना घर के भेदी को, जपे दूसरों की माला ।। पाल हुर्रियत मुसटंडों को, क्यों अश्रु बहाते हो । दोष दूसरों को दे देकर, हमकों ही बहकाते हो ।। राजनीति के ढाल ओढ़ कर, बुद्धिमान कहलाते हो। इक थैली के चट्टे-बट्टे, जो सरकार बनाते हो...

सपना मा आवत हे रे

//गीत//टूरा-खुल्ला चुन्दीवाली टूरी, सपना मा आवत हे रे ।मोरै तन मन के बादर मा, बदरी बन छावत हे रे ।।टूरी-लंबा चुन्दी वाले टूरा, सपना मा आवत हे रे ।मोरे तन मन के बदरी मा, बादर बन छावत हे रे ।।टूरा-चढ़े खोंजरारी चुन्दी हा, माथा मा जब-जब ओखर ।घेरी-बेरी हाथ हटाये, लगे...

सभ्य बने के चक्कर मा

लइका दाई के दूध पिये, दाई-दाई चिल्लाथे ।आया डब्बा के दूध पिये, अपने दाई बिसराथे।।जेने दाई अपने लइका, गोरस ला नई पियाये।घेरी-घेरी लालत ओला, जेने ये मान गिराये ।।सभ्य बने के चक्कर मा जे, अपन करेजा बिसराये ।बोलव दुनिया वाले कइसे, ओही हा सम्य कहाये ।।दाई के गोरस कस होथे,...
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