Select Page

बसंत के गीत

🙏🌹 *गीत बसंती~सार छंद*🌷🙏 ******************************** (सार छंद) बाँध बोरिया बिस्तर अपना, दुबक चला जड़काला। अब बसंत आया अलबेला, दिखता नया निराला। बाग बगीचे कानन झुरमुट, बरबस ही बौराए। यौवन व्यापक यत्र-तत्र तब, राग बसंती गाए। कामदेव युवराज स्वागतम्, स्वीकारो वरमाला।...

साहित्य और समाज

समाज तन है तो साहित्य मन है,समाज उर है तो साहित्य स्पंदन है। एक दुजे के बिन हैं ये अस्तित्वहीन, समाज रूप है तो साहित्य दर्पण है। निर्बल का शोषण, धन का पोषण, मिथ्यारोपण, जब हो समाज लक्षण। सर्वजन हित, सुनीति के गीत, मीत-अमित, बने साहित्य रीत। समाज शब्द है, साहित्य...

मनहरण घनाक्षरी

यजन-जन लोकतंत्र, भारत का मूलमंत्र, हो न कोई षड़यंत्र, यही पहचान हो। वोट देना एक धर्म, प्रथम हो यह कर्म, इसमें कैसी है शर्म, मन अभिमान हो। भारत भाग्य विधाता, शक्तिमान मतदाता, कर्तव्य है जो निभाता, जनता महान हो। क्रम यह टूटे नहीं, कोई अब छूटे नहीं, घर पर रुके नहीं, पूरा...

रोला छंद – भाईदूज कथा

यमुना अरु यमराज, बहन भाई का नाता। यमराजा अति व्यस्त, नहीं मिल भगिनी पाता।-1 यमुना भ्राता नेह, नयन से नीर बहाती। भाई आओ द्वार, यही कह सदा बुलाती।-2 आया कार्तिक मास, दूज तिथि शुक्ल सुशोभन। पहुँचा बहना धाम, किया फिर सादर भोजन।-3 छलका निश्छल प्रीत, यमी ने मान बढ़ाई। भाई का...

दोहा पद

  चौंक पुरा है आँगना, रंगोली शुभ द्वार। अँधियारे को मेटने, जलता दीप कतार।-1 शहर गाँव हर द्वार में, गली चौक चौपाल। बस उजियाला बाँटता, अमित दीप की माल।-2 बम अनार लख फोड़ते, बच्चों की जो फौज। फुलझड़ियाँ ले भागते, इनकी तो बस मौज।-3 स्याह अमावस रात में, लक्ष्मी का...
error: