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कज्जल छंद

  मनखे मनखे बने जोड़। भेद भाव ला अपन छोड़। आथे कतको राह मोड़। झन तैं सबले नता तोड़। सबला संगी अपन जान। झन कोनो मा भेद मान। दू दिन के सब सगा तान। एक सबो के हवय जान। माटी के तन हवय तोर। सुनले संगी गोठ मोर। रखले गठरी बाँध जोर। छूट जही कब प्राण तोर। भरम भेद के अपन खोल।...

जस चश्मा के रंग होय

जस चश्मा के रंग होय । तइसे मनखे दंग होयभाटा कइसे हवय लाल । पड़े सोच मा खेमलालचश्मा ला मन मा चढ़ाय । जग ला देखय हड़बड़ायकरिया करिया हवय झार । ओ हा कहय मन ला मारअपन सोच ले दुनिया देख । मनखे जग के करे लेखतोर मोर हे एक रंग । कहिथे जब तक रहय संगदुनिया हा तो हवय एक । दिखथे...

कंचन काया हवय तोर

कंचन काया हवय  तोर ।लजागे चंदा सुन सोर ।कतका सुघ्घर तोर गोठ ।सुन कोयल करे मन छोट ।चुन्दी कारी तोर देख ।घटा बादर होगे पेख ।         पेख -पेखन – खिलौनापारे पाटी बने मांग ।पाछू फूल गजरा टांग ।मांगमोती आघू ओर ।सुरूज जस चमके खोर...
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