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सोच रहा हूँ क्या लिखूँ

  सोच रहा हूँ क्या लिखूँ, लिये कलम मैं हाथ । कथ्य कथानक शिल्प अरू, नहीं विषय का साथ ।। नहीं विषय का साथ, भावहिन मुझको लगते । उमड़-घुमड़ कर भाव, मेघ जलहिन सा ठगते ।। दशा देश का देख, कलम को नोच रहा हूँ । कहाँ मढ़ू मैं दोष, कलम ले सोच रहा हूँ ।। सदियों से तो स्वार्थ...

पसीना बहाना चाहिये

दुनिया में दुनियादारी चलानी है, सभी रिस्तेदारी निभानी है, दुनिया का आनंद जो लेनी है, तो पैसा कमाना चाहिये । सीर ऊँचा करके जीना है, अपने में अपनो को जीना है, अपने दुखों को सीना है, तो पैसा कमाना चाहिये । किसी से प्रेम करना है, किसी का दुख हरना है, किसी को खुश करना है,...

बढ़ने दो इन बढ़े हुये कदमों को

बढ़ने दो इन बढ़े हुये कदमों को इन्हें क्यों रोकते हो । पाना है जो मंजिल तो,अपनी माथा क्यो ठोकते हो ।। ठान लिये हो जब अपना वजूद बनाना तो क्यो रूकते हो । चढ़नी है अभी चढ़ाई तो ऊंचाई देखकर क्यों झुकते हो ।। रात का अंधेरा सदा छाया रहता है, ऐसा तुम क्यो सोचते हो । अंधेरे को...

छोड़ शांति के खादी

घात प्रश्न तो आज खड़े हे, कोन देश ला जोरे ।भार भरोसा जेखर होथे, ओही हमला टोरे ।।नेता-नेता बैरी दिखथे, आगी जेन लगाथे ।सेना के जे गलती देखे, आतंकी ला भाथे ।।काला घिनहा-बने कहँव मैं, एके चट्टा-बट्टा ।सत्ता धरके दिखे जोजवा, पाछू हट्टा-कट्टा ।।देश पृथ्ककारी के येही,...
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