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दाई के गोरस सही, धरती के पानी

दाई के गोरस सही, धरती के पानी ।दाई ले बड़का हवय, धरती हा दानी ।।सहत हवय दूनो मनन, तोरे मनमानी ।रख गोरस के लाज ला, कर मत नादानी ।।होगे छेदाछेद अब, धरती के छाती ।कइसे बरही तेल बिन, जीवन के बाती ।।परत हवय गोहार सुन, अंतस मा तोरे ।पानी ला खोजत हवस, गाँव-गली खोरे ।।रहिही जब...
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