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लइका पन के सुरता

लइका पन के सुरता लइकापन के  सुरता आथे, मन म अब्बड़ खुसी अमाथे, ओ दिन बादर अउ नइ लहुटय, काबर ?कहि के पछताथे। मोर गांव के रुख राई, सुरता आथे तोर सुघराई, हरहर हरहर,बाजे पीपर, जब चले पवन पुरवाई। सुतजव सुतजव जम्मो कहय, फेर आँखी म नींद नई आय पोप पोप फेर बाजे लागिस, लागथे बरफ...
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