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अहीर छंद

-अहीर छंद- धरे एकादश भार । अंत जगण भर डार बनही छंद अहीर । मन मा धारव धीर जइसे- खोलव ज्ञान कपाट । देखव रूप विराट जेखर ओर न छोर । एको मिलय न कोर जेखर आघु पहाड़ । लागत रहय कबाड़ धुर्रा-कण कस जान । जतका दिखय समान जेखर हाथ हजार । लागय नार-बियार कतका पाँव गिनाँव । कतका बुद्धि...

रखबे बात ल काढ़

ले मनखेपन सीख । नोनी देवय भीख कोनो मरय न भूख । होय न भले रसूखउघरा के तन ढाक । नंगरा ल झन झाकभूखाये  बर  भात । रोवइया बर बातहमरे देश सिखाय । नोनी सुघर निभायदेखत बबा अघाय । दूनो हाथ लमायदेवय बने अशीष । दिल के रहव रहीसनोनी करय सवाल । काबर अइसन हालमांगे...
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