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दोष देत सरकार ला, सब पिसत दांत हे

दोष देत सरकार ला, सब पिसत दांत हे ।ओखर भीतर झाक तो, ओ बने जात हे ।जनता देखय नही, खुद अपन दोष ला ।अपन स्वार्थ मा तो परे, बांटथे  रोष ला ।।वो लबरा हे कहूॅं, तैं सही होय हस ?गंगा जल अउ दूध ले, तैं कहां धोय हस ??तैं सरकारी योजना, का सही पात हस ?होके तैं हर गौटिया,...
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