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अमृत ध्वनि: नेता आही

नेता आही गाँव मा, अब तो भाई रोज। आवत चुनाव तीर हे, गली गली हे खोज। गली गली हे , खोज हमर अब, करही वादा। उही जीतही , जूठ बोलही , जे हा जादा। बैर बाँट के,गली गली मा , रार मताही। अब स्वारथ बर, रोज गाँव मा , नेता आही। -मथुरा प्रसाद...

अमृत ध्वनि: नारी ममता रूप।

नारी ममता रूप हे, मया पिरित के खान। घर के सुख बर रात दिन, देथे तन मन प्रान।। देथे तन मन , प्राण लगा के, सेवा करथे। अपने सहिथेे , अउ घर भर के, पीरा हरथे।। दाई बेटी, बहिनी पत्नी, अउ सँगवारी। अलग अलग हे, नाँव फेर हे , देवी नारी।। -मथुरा प्रसाद...

अमृत ध्वनि: चमचा बन के खास।

गरब करत हे आज रे, कुकुर सहीं बिस्वास। मनखे मन इतरात हे, चमचा बनके खास।। चमचा बनके, बाँधय पट्टा, जीभ लमावय। ये पाछु घुमय ,फोकट पावय , नगते खावय।। अपन ददा के, छोड़ आन के,नाँव घरत हे। सरम लाज नइ, लागय का जी, गरब करत हे।। -मथुरा प्रसाद...

अमृत ध्वनि: मया करइया।

मया करइया ला कभू, नइ भावय संसार।। बैरी जग ला मान के, करले रे तँय प्यार। करले रे तँय , प्यार सबो ला, एक बरोबर। भले सबे झन, खनहीँ खाँचा ,जी तोरे बर। प्यार मारही, तोर हृदय ले, कोन मरइया। जी जाथे जी, मरके पर बर , मया करइया।   मथुरा प्रसाद वर्मा कोलिहा, बलौदाबाजार(छ ग...
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