Select Page

नव वर्ष

नव वर्ष हर्ष लिए आया मेरे द्वार नयी चाह है भरी हुई नये राह के साथ । आओं कुछ संकल्प करें मिटे आपसी बैर भेदभाव को छोड़कर बांटे सबमें प्रेम । आओं सीखें नया हुनर नये उमंग के साथ गया पुराना साल अब नव वर्ष लाया है सौगात । बीते वर्ष की बातों को अब नहीं करना याद लेकर खुशियां...

संबंध

मन में आज अजीब सा कुतूहल है दिल की धड़कन तेज़ है भाव गम्भीर स्वर में एक माधुर्य है  आज स्वर प्रस्फुटित भी हुए है भावनाएँ बलखाने लगी हैं स्वर ध्वनियाँ कर्णप्रिय होने लगी हैं… आज ये सब मिलकर कुछ बताना चाहती है अपने रिश्ते जताना चाहती है ये अपने अनमोल व नाज़ुक बन्धन...

गिद्ध

  तुम गिद्ध हो वाकई गिद्ध…. तुम्हारे साथ अपनी टोली है अपने ही समान गिद्धों का कबीला भी है। वो भी तुम्हारी ही तरह है उनका शरीर तो इंसान-सा है  पर ताज्जुब इस बात का है कि उनकी भी आत्मा गिद्धों-सी है…।   बर्बर गिद्ध सी… जो नोचती है इंसानियत को काटती है...

तिर्यक !

              ”  तिर्यक ! ” ( गोपाल चंद्र मुखर्जी ) ——————— हो रहे है विकास तन का तालों से ताल मिलाकर समय का, मिल रहे है पुष्टि, चतुष्पदों का संग में- जब, कोई फेकता है खाना कूड़ेदान में ! छीना झपटी के दौर में...

तिर्यक

        ”  तिर्यक” हो रहे है विकास तन का तालों से ताल मिलाकर समय का, मिल रहे है पुष्टि, चतुष्पदों का संग में- जब, कोई फेकता है खाना कूड़ेदान में ! छीना झपटी के दौर में – नाखूनों का – दांतों का सुहाग से , बढ़ता है स्वाद खाना का – हर एक ग्रास...
error: