Select Page

सुन रे भोल
(त्रिभंगी छंद)

बनव-बनव मनखे, सबझन तनके, माटी कस सनके, बाँह धरे ।
खुद ला पहिचानव, खुद ला मानव, खुद ला सानव, एक करे ।।
ईश्वर के जाये, ये तन पाये, तभो भुलाये, फेर परे ।
तैं अलग मानथस, खुद ल जानथस, घात तानथस, अलग खड़े ।।

तैं कनिहा कस के, आघू धस के, लाठी धर ले, पोठ बने ।
हे बैरी कतका, देवय गचका, जेन देश बर, हवय तने ।।
मनखेपन फोरय, देशे टोरय, आतंकी के, नाम धरे ।
अब मारब ओला, सुन रे भोला, अपन सोच ला, पोठ करे ।।

-रमेशकुमार सिंह चौहान

error:

SURTA SHOP

SURTA SHOP में जाकर हमारे साहित्यिक किताबें खरीदें, जहां छंद शास्त्र और अन्य साहित्यिक पुस्तकें उपलब्ध हैं।

 

GO TO SURTA SHOP

You have Successfully Subscribed!

Share This