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मांगे आज सबूत, करे जो शोर चुनावी ।
सोच रहा है देश, हुआ किसका बदनामी ।।
देख नियत पर खोट, नियत अपना ना देखे ।
निश्चित ये करतूत, शत्रु ने हाथ समेखे ।
प्रमाण-पत्र देश-प्रेम का , तुझे अन्य से ना चाहिये ।
किन्तु हमें तो तुमसे सही, इसका इक सबूत चाहिये ।।

कल की बातें छोड़, आज का ही दिखलाओ ।
देख रहा जो देश, देश को ही बतलाओ ।।
कल की वह हर बात, दिखे जो तुम दिखलाये ।
झूठा मानें या सत्य, कौन हमको बतलाये ।।
पीढी ठहरे हम आज के, देख रहे हैं हम आज को ।
लोकतंत्र का सजग प्रहरी, देखे प्रतिनिधि के काज को ।।

-रमेशकुमार सिंह चौहान

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