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जन्म-जन्मों से सदा ही, भारती का लाल मैं तो।
देह की रुधिर गीत, भारती के गाता हैं ।।
मंत्र जपने से होते, या नही है पुण्य भले।
वंदेमातरम बोल, पाप धुल जाता हैं।।
ब्रह्मा विष्णु औ’महेश, तुझमें प्रतीत होता।
कर्म की सुलेखनी तू, ही मेरा विधाता हैं।।
आन बान शान हिन्दजन मन प्राण हिन्द।
व्योम चूमता ध्वजा सदा ही लहराता है।।

-चंद्रेश चन्द्राकर “पथिक”
भूमियापारा, मुंगेली
मो.-9109454554

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