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नेता मन के दूध भात हे, बोलय झूठ लबारी ।
चाहय बैरी दुश्मन बन जय, चाहय त स॔गवारी ।।

झूठ लबारी खुद के बिसरय, बिसरय खुद
के चोरी ।
चोर-चोर मौसेरे भाई, करथे सीनाजोरी ।।

सरहा मछरी जेन न छोड़े, कान जनेऊ टांगे ।
खुद एको कथा न जानय, प्रवचन गद्दी मांगे ।।

खेत चार एकड़ बोये बर, बनहूं कहय गौटिया ।
काड़ छानही के बन ना पाये, बनही धारन पटिया ।।

दाना अलहोरव सब चतुरा, बदरा बदरा फेकव ।
बने गाय गरुवा ला राखव, हरही-हरहा छेकव ।।

-रमेश चौहान

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