Select Page

नँदावत किसानी

देख तो संगी मोर छ.ग.के,
किसानी घलो नँदावत हे।
पुरखा के चिन्हा नाँगर बइला ,
कोनो कोनो मेर फँदावत हे।।

अरा ररा तता तता नँदागे,
नई हे अरई अऊ तुतारी जी।
नाँगर के मुठिया धरइया नँदागे,
नँदागे हाथ के बुवारी जी।।

हँसिया के लुवइया नँदागे,
नँदागे करपा के बँधइया जी।
सिला बिनइया लइका नँदागे,
नँदागे दऊरी के फँदइया जी।।

लइका पन के सुरता आथे,
मोर भर्री खेत वो दिन के।
लाड़ू मुर्रा खावन संगी।
घुम घुम सिला बिन के।।

धिरे धिरे गाड़ी बेलन नँदाथे,
अऊ नँदाथे पैरा के खोवइया।
आऊ कोन ल बताँव संगी,
नँदागे कोठार के सोवइया।।

अब के मनखे नवा नवा,
मशीनी जाल म छँदावत हे।
देख तो संगी मोर छ.ग.के,
किसानी घलो नँदावत हे।

              नागेश कश्यप

        कुँवागाँव, मुंगेली छ.ग.।।

            7828431744

error:

SURTA SHOP

SURTA SHOP में जाकर हमारे साहित्यिक किताबें खरीदें, जहां छंद शास्त्र और अन्य साहित्यिक पुस्तकें उपलब्ध हैं।

 

GO TO SURTA SHOP

You have Successfully Subscribed!

Share This