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नमन नवनिधि नारी – रोला छंद में गीत…
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*जननी जीवाधार, जगत की जिम्मेंदारी।*
*नूतन नित नवकार, नमन है नवनिधि नारी।*

नित्य नये प्रतिमान, सृजन साहस से गढ़ती।
मिला कदम से ताल, प्रगति पथ पर नित बढ़ती।
खुद रचती इतिहास, अडिग अभिजित् आरोही।
वंदनीय है नार, संगिनी वाम बटोही।
अधिगुण अनु अधिभार, अवन अविकल अविकारी।
*नूतन नित नवकार, नमन है नवनिधि नारी।*-1

उड़ती उच्च उड़ान, अथक बस अपने दमपर।
दफ्तर घर दरबार, कहीं भी कब है कमतर।
संवेदी पहिचान, मोम सी माया ममता।
कोमल और कठोर, धरातल जैसी क्षमता।
काज करे पुरजोर, सेविका सद सहचारी।
*नूतन नित नवकार, नमन है नवनिधि नारी।*-2

स्वयं भाग्य की रेख, खींचती आज अकेली।
समानता सद्भाव, बूझती कर्म पहेली।
समझ सहित सहकार, सदन को करती उपवन।
सम्यक सोच विचार, सहज सुलझाती उलझन।
चाह न वेतनमान, मान की यह अधिकारी।
*नूतन नित नवकार, नमन है नवनिधि नारी।*-3
*जननी जीवाधार, जगत की जिम्मेंदारी।*
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✍ *कन्हैया साहू “अमित”*✍
©भाटापारा~छत्तीसगढ़®
सर्वाधिकार सुरक्षित…08/03/2019

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