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कठपुतली बनाके नचाया किसी ने

पानी में आग लगाया किसी ने
बातों में हमको फसाया किसे ने

किया कराया है किसी और का
चालाकी से अपना बताया किसे ने

लड़ते रहे हम बाहरी लोगों से
भीतर से हमको सताया किसी ने

हरदम बंधी रही आंखों में पट्टी
देखा वही जो दिखाया किसी ने

बेबसी बड़ी है अपनी भी यारों
कठपुतली बनाके नचाया किसी ने

भूलने लगे थे हम तो दर्द पुराने
दुखती रगो को फिर दबाया किसी ने

रूकते नहीं अब आंखों से आंसू
सुकून दिलो का चुराया किसी ने

सत्यधर बान्धे
गंजपारा बेमेतरा
छत्तीसगढ़

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